डा रिचर्ड एल बेंकिन
एक अमेरिकी आगांतुक होने के नाते जब मै दक्षिण एशिया के देशो का भ्रमण करता हु तो पाता हु कि यहा के लोग भारत से नफरत करते है। यह सच्चाई है और इसको मै छुपा नही सकता। पाक द्वारा भारत से नफरत की वजह 1947, 1965 और 1971 का युद्ध साथ ही 1999 का कारगिल संघर्ष भी शामिल है। कश्मीर तो उनका सदा बहार मुद्दा तो है ही है। मेरी समझ के अनुसार निकट भविष्य मे भारत और पाकिस्तान के बीच एक परमाणु युद्ध होना अनिवार्य दिखता है। बंग्लादेशी भी भारत के विरुद्ध शत्रु का भाव रखते है वजह किसी को भी मालुम नही है। भारत ने बंग्लादेश का निर्माण कराया इसके वावजुद भारत के विरुद्ध ऐसी भावना क्यो है यह समझ से पडे है। बंग्लादेशी जानकर ने मुझे बताया कि आप भारत और इजरायल के विरोध मे बाते करके यहा पर मित्र बना सकते है। ऐसी ही बाते नेपाल के बारे मे भी कही जा सकती है।
भारत और नेपाल विश्व मे मात्र दो हिन्दू देश है। दोनो देशो की
जनसंख्या मे 80 प्रतिशत से ज्यादा लोग हिन्दू है। यही पर पूरे संसार के दस
मे नौ हिन्दू रहते है। यहा के समप्रदायिक और धार्मिक महौल को देखते हुए
दोनो देशो का सम्बन्ध प्रगाढ होने चाहिए पर ऐसा नही है। नेपाली प्रेस उसकी
प्रकार के भारत विरोधी बाते लिखता है जैसा कि पाकिस्तान और बंग्लादेश के
प्रेस मे लिखा जाता है। नेपाल मे भारत के प्रभाव की चर्चा तो रह्ती है पर
लोगो को भारत के शक्तिशाली होने पर नाराजगी भी है । हाल ही नेपाल मे
आमचुनाव हुए जिसमे भारत विरोधी रुझान रखने वाले माओवादियो को विजय मिली
जिसके फलस्वरुप भारत विरोधी मंच और पक्का बन गया। 1950 के सन्धि पर
माओवादी को आपत्ति है। इसके वाबजूद नेपाली तस्करी के माध्यम से अवैध ,
हथियार, दवा, चरस गांजा और अफीम की इधर से उधर करते है। भारतीये सेना सब
कुछ जानते हुए भी कुछ नही कर पा रही है। दोनो देशो के बीच खुली सीमा
है इसका फयदा भी शरारती तत्व उठाते है।
पाकिस्तान का आत्मघाती
कदम सभी जानकार लोगो को चिंता मे डाले हुए है। यही हाल
बंग्लादेश का भी है। इसी तरह के विरोध से अमेरिका भी जुझ रहा
है। उदाहरण स्वरुप बंग्लादेश के इस्लामी आतंकवादी भारत के उत्तरी और
पूर्वी सीमा से अवैध घुसपैठिये को भारत की सीमा मे चोरी चुपके से घुसा रहे
है ताकि भारत की एकता और अखंडता को छिन्न भिन्न किया जा सके । ये
बंग्लादेशी भारत की राजधानी दिल्ली मे राशन कार्ड बनबाके भारत के नागरिक
के रुप मे रहने लगे है। दोनो मुस्लिम देश साजिश के अंतर्गत हिन्दुओ की
आबादी को तहस नहस करने पर तुले है। सारी लडाई पाकिस्तान मे लडी जा रही है
जहा पर हिन्दुओ की आबादी 20 प्रतिशत से घटकर एक प्रतिशत रह गयी है।
बंग्लादेश मे भी यही हाल है जहा पर हिन्दुओ की आबादी पहले दस मे एक हुआ
करती थ्री जो घटकर 5 मे एक हो गयी है। भारत इन घटनाओ का जबाब छदम्य
धर्मनिरपेक्ष के माध्यम से देने का प्रयास करता है। इसका मतलब यह है कि
भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और लोगो के धार्मिक मामले मे कोई अडंगा नही
डालता है। भारत मे हिन्दुओ की आबादी ज्यादा है जिस वजह से सरकार चाह कर भी
इस्लामी आतंकवादियो पर कारवाई करने से हिचकती है यानि लोगो को न लगे कि
सरकार किसी एक समुदाय का साथ दे रही है। हाल भी मुस्लमानो को हज यात्रा की
सब्सिडी का प्रवधान रखा गया लेकिन असम , बंग्लादेश और पश्चिम बंगाल के
हिन्दु यात्री के लिए कुछ नही किया गया।
इसी तरह अमेरिका लोगो
को सहयोग देता जो किसी भी अन्य देश से काफी ज्यादा है। मिडिल ईस्ट के तेल
उद्योग को जो पैसा अमेरिका मुहैया कराता है वह बहुत ज्यादा है। पैसा तो वे
स्वीकार लेते है। यदि अलबानिया मे सर्वो पर हमला होता है तो सारा मुस्लिम
जगत चिखने लगता है । लेकिन रुस चेचेनिया मे हमला करता है तो कोई कुछ नही
कहता है इसकी वजह क्या है। सारे अमेरिकी होटल मे खाना खायेंगे, अमेरिकी
तकनीक का फयदा उठायेंगे लेकिन अमेरिका कोई सही कारवाई भी करता है तो इसे
इस्लाम विरोधी करार दिया जाता है। अमेरिका की अलोचना होने लगती है। ऐसी
दोहरी और दोगली राजनीति को कब तक विश्व की जनता सहेगी। अमेरिका की आर्थिक
संकट की एक वजह मुफ्त्त का धन मुहैया करना है, अमेरिका अपने मित्र
देशो को आर्थिक सहायता देता है इसका ज्वल्ंत उदाहरण पाकिस्तान है। आतंकवाद
से लडने केलिए अमेरिका ने करोडो डालर की सहायता की फिर भी पाक मे आतंकवाद
फलफूल रहा है।
भारत और अमेरिका आपस मे क्या समानता है
यह तो पता नही फिर दोनो एक ही समस्या से जुझ रहे है। दोनो देशो
लोकतांत्रिक व्यवस्था है भारत मे संसदीय प्रणाली है तो अमेरिका मे
राष्ट्रपति प्रणाली है। लोकतांत्रिक भारत ऐसे देशो से घिरा है जहा पर उसके
आसपास लोकतंत्र का गला घोटा जाता रहा है। यह अमेरिका के लिए लागू नही होता
है। कुछ लोग इस बात पर जोड दे रहे है कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था ढलान पर
है और युरोप की अर्थव्यवस्था उठान पर है। लेकिन सच्चाई यह है कि विश्व की
अर्थव्यवस्था अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर निर्भर है यानि अमेरिकी
अर्थव्यवस्था अच्छी होगी तो विश्व की होगी नही तो नही होगी। सबसे ज्वल्ंत
उदाहरण तेल की बढती कीमते से पुरे विश्व की आर्थिक महौल को ही हिला
कर रख दिया इसका आरोप भी अमेरिका पर ही लगता हैकि उसी के वजह से ऐसा हुआ।
भारत और अमेरिका दोनो तकनीकि तौर पर विकसित देश है। विश्व मे सबसे अच्छी
पढाई की व्यवस्था अमेरिका मे ही है। तकनीक मामले मे इजरायल को छोडकर
अमेरिका को कोई अन्य देश ट्क्कर नही दे सकता है। भारत जो नया नया
धनी बना है इसकी तरक्की अभी बडे शहरो यानि कि दिल्ली, मुम्बई, पुणे,
बंगलोर और अन्य शहरो मे भी फैल रहा है। दोनो देशो के लोगो के रहन सहन का
स्तर काफी उठा है।
इस तरह की जानकारिया इस बात को साबित करती है कि भारत अमेरिका मे कितनी समानता है। अमेरिका पूरे संसार मे इस्लामी आतंकवाद के विरोध मे लड रहा है, इसमे इजरायल भी उसका साथ दे रहा है। भारत मे इस ओर जागरुकता बढी है और लोगो को आतंकवाद के खतरे से सजग करने का प्रयास किया जा रहा है। खास तौर पर इस क्षेत्र मे जहा आतंकवाद और इस्लाम का नपाक गठबन्धन सक्रिये है जिसको तोडना अति आवश्यक है। भारत और इजरायल के सम्बन्ध पिछले कुछ वर्षो मे काफी प्रगाढ हुए है जिससे इस्लामी आतंकवाद मिटाने मे काफी सहुलियत होगी। भारत इजरायल और अमेरिका इस्लामी आतंकवाद के निशाने पर है। विश्व के अन्य देश इन देशो के सफलता से जलते है इसकी वजह उनकी अपनी कायरता है। इस्लामी आतंकवाद और कम्युनिष्ट के चुंगल से विश्व को कोई राष्ट्र बचा सकता है तो यही तीन देश है यानि भारत , इजरायल और अमेरिका यही देश मिलकर विश्व से इस्लामी आतंकवाद को मिटायेंगे। आतंकवाद पर विजय प्राप्त करेंगे।
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